भैरवासन: योग में आध्यात्मिक एवं शारीरिक सांगत्य का संगम

भैरवासन: अण्कुशासन का आध्यात्मिक महत्व

योग एक आध्यात्मिक और शारीरिक स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। योग के विभिन्न आसन और मुद्राएं शारीरिक तंतुओं को बढ़ावा देने के साथ ही मानसिक और आध्यात्मिक विकास में भी मदद करती हैं। इसमें से एक प्रमुख आसन है “भैरवासन” जिसे “अण्कुशासन” भी कहा जाता है। यह आसन शरीर, मन, और आत्मा के संगम को प्राप्त करने में मदद करता है और आध्यात्मिक महत्व रखता है।

भैरवासन, जिसे अण्कुशासन के रूप में भी जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण योगिक आसन है जो शारीरिक और मानसिक दृढ़ता देता है। इस आसन को भैरव स्वरूप की प्रतिष्ठा और आध्यात्मिक अर्थ में महत्वपूर्ण रूप से जोड़ा जाता है।

भैरवासन का विधि:
भैरवासन को प्राप्त करने के लिए, आपको योग गुरु के नेतृत्व में योगासन करना चाहिए। यह आसन सबसे पहले योग

से परिचित होने के बावजूद उनके लिए बहुत ही कठिन होता है। इसे अकेले करना खुद आपके लिए खतरनाक हो सकता है, इसलिए योग गुरु के मार्गदर्शन में करना सबसे अच्छा होता है।

भैरवासन के फायदे:

  1. शारीरिक स्वास्थ्य: भैरवासन शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। इसके प्रैक्टिस से हृदय, श्वासनली, पेट, और कमर की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।
  2. मानसिक शांति: भैरवासन के प्रैक्टिस के दौरान मानसिक चिंता और तनाव कम होते हैं, और मनःशांति मिलती है।
  3. आध्यात्मिक विकास: भैरवासन को प्रैक्टिस करते समय, योगी अपने आत्मा के साथ मेल करने का प्रयास करते हैं और आध्य

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